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Nobel Prize in Physics 2025

Nobel Prize in Physics 2025

नॉबेल पुरस्कार 2025 — भौतिकी में “चिप पर क्वांटम प्रयोग”

2025 में नॉबेल पुरस्कार (Physics) उन वैज्ञानिकों को दिया गया जिन्होंने चिप (electrical circuit) पर किए गए प्रयोगों में क्वांटम भौतिकी को प्रत्यक्ष रूप से दिखाया। (NobelPrize.org)

“Their experiments on a chip revealed quantum physics in action” (NobelPrize.org)

“A major question in physics is the maximum size of a system that can demonstrate quantum mechanical effects. This year’s Nobel Prize laureates conducted experiments with an electrical circuit in which they demonstrated both quantum mechanical tunnelling and quantised energy levels in a system big enough to be held in the hand.” (NobelPrize.org)

“This year’s Nobel Prize in Physics has provided opportunities for developing the next generation of quantum technology, including quantum cryptography, quantum computers, and quantum sensors.” (NobelPrize.org)

नीचे हम इस खोज की पृष्ठभूमि, उसका महत्व, और भविष्य की संभावनाओं को हिन्दी में विस्तार से समझेंगे।


खोज की पृष्ठभूमि और वैज्ञानिक योगदान

क्वांटम तुन्नेलिंग और ऊर्जा स्तरों की परिमाणिकता

क्वांटम यांत्रिकी (quantum mechanics) में यह एक दिलचस्प और अद्भुत पहलू है कि एक कण (particle) एक “अतीत बाधा (barrier)” को पार कर सकता है, जैसे कि वह “द्वार से सीधे होकर निकल जाए” — इसे तुनलिंग (tunnelling) कहा जाता है। (NobelPrize.org)

परंपरागत दृष्टिकोण यह कहता है कि बड़े या “मैक्रोस्कोपिक” (macroscopic) सिस्टम में ऐसी क्वांटम विशेषताएँ प्रदर्शित नहीं हो पातीं — क्योंकि बड़े सिस्टम में अनेक कण होते हैं और इनके बीच की अनियमितताएँ (decoherence) क्वांटम व्यवहार को नष्ट कर देती हैं। (NobelPrize.org)

लेकिन 2025 के पुरस्कार प्राप्त वैज्ञानिकों — John Clarke, Michel H. Devoret, John M. Martinis — ने एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक सर्किट डिजाइन किया, जिसमें उन्होंने यह दिखाया कि

  • एक मैक्रोस्कोपिक सिस्टेम (इतना बड़ा कि हाथ में पकड़ा जा सके) में भी क्वांटम तुन्नेलिंग हो सकती है, और

  • वह सिस्टेम ऊर्जा स्तरों (quantised energy levels) को अवशोषित और उत्सर्जित कर सकती है, बिल्कुल क्वांटम सिद्धांतों के अनुरूप। (NobelPrize.org)

इस सर्किट में सुपरकंडक्टर्स (superconductors) और जोसेफ्सन जंक्शन (Josephson junctions) का प्रयोग हुआ, जिससे इलेक्ट्रॉनों के समन्वित व्यवहार को एक “कुल्मित” प्रणाली (collective quantum system) के रूप में देखा गया। (NobelPrize.org)

उदाहरण के लिए, सर्किट प्रारंभ में एक ऐसी अवस्था में था जहाँ वोल्टेज (voltage) लगभग शून्य था। कुछ समय बाद, यह सर्किट क्वांटम तुन्नेलिंग के माध्यम से उस बाधा (barrier) को पार करके दूसरी अवस्था में चला गया और वोल्टेज उत्पन्न हुई। (NobelPrize.org)

साथ ही, वे यह भी दिखा पाए कि इस सिस्टेम में ऊर्जा स्तर “डिज़्क्रीट” (discrete) हैं — अर्थात वह केवल निश्चित मात्राओं (quanta) में ही ऊर्जा स्वीकार करती है या छोड़ती है। (NobelPrize.org)


इस खोज का महत्व और प्रभाव

  1. क्वांटम और क्लासिकल दुनिया का पुल
    यह प्रयोग यह सिद्ध करते हैं कि क्वांटम व्यवहार केवल सूक्ष्म स्तर तक सीमित नहीं है — बल्कि उपयुक्त डिजाइन और नियंत्रण की स्थिति में बड़े स्तर पर भी देखा जा सकता है। इससे क्वांटम और क्लासिकल (classical) दुनियाओं के बीच की बाधा टूटती है।

  2. भविष्य की क्वांटम तकनीकों का आधार
    इस खोज ने नए द्वार खोले हैं:

    • क्वांटम कंप्यूटर्स (Quantum Computers)

    • क्वांटम क्रिप्टोग्राफी (Quantum Cryptography)

    • क्वांटम सेंसर (Quantum Sensors)
      इन तकनीकों की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाने में यह खोज ज़रूरी भूमिका निभा सकती है। (NobelPrize.org)

  3. “कृत्रिम परमाणु” (Artificial Atom) विचार
    इस तरह की इलेक्ट्रॉनिक सर्किटें को कभी-कभी “कृत्रिम परमाणु” कहा जाता है क्योंकि वे क्वांटम व्यवहार करती हैं जैसे एक परमाणु — ऊर्जा स्तर, अवशोषण-उत्सर्जन आदि। ये प्रयोग इन “कृत्रिम परमाणुओं” को अन्य प्रयोगों या प्रणालियों से जोड़ने, नियंत्रित करने, और उपयोग करने का मार्ग खोलते हैं।

  4. स्यूचालन (Control) और कम दोष दर (Error Rates) में सुधार
    यदि ऐसी प्रणालियाँ और बेहतर नियंत्रित हो सकें, तो वे क्वांटम कंप्यूटिंग में “दोष (error)” की समस्या को कम कर सकती हैं।

2025 के नोबेल पुरस्कार  विजेताओं का परिचय 


जॉन क्लार्क

भौतिकी में नोबेल पुरस्कार 2025
जन्म: 1942, कैम्ब्रिज, यूके
पुरस्कार के समय संबद्धता: कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले, कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका
पुरस्कार प्रेरणा: "विद्युत परिपथ में मैक्रोस्कोपिक क्वांटम यांत्रिक सुरंग और ऊर्जा क्वांटीकरण की खोज के लिए"
पुरस्कार का हिस्सा: 1/3

       मिशेल एच. डेवोरेट

                      
भौतिकी में नोबेल पुरस्कार 2025
जन्म: 1953, पेरिस, फ़्रांस
पुरस्कार के समय संबद्धता: येल विश्वविद्यालय, न्यू हेवन, कनेक्टिकट, अमेरिका; कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा, कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका
पुरस्कार प्रेरणा: "विद्युत परिपथ में मैक्रोस्कोपिक क्वांटम यांत्रिक सुरंग और ऊर्जा क्वांटीकरण की खोज के लिए"
पुरस्कार का हिस्सा: 1/3


जॉन एम. मार्टिनिस



भौतिकी में नोबेल पुरस्कार 2025
जन्म: 1958
पुरस्कार के समय संबद्धता: कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय, सांता बारबरा, कैलिफ़ोर्निया, अमेरिका
पुरस्कार प्रेरणा: "विद्युत परिपथ में मैक्रोस्कोपिक क्वांटम यांत्रिक सुरंग और ऊर्जा क्वांटीकरण की खोज के लिए"
पुरस्कार का हिस्सा: 1/3

निष्कर्ष

शब्दों में पुनरावलोकन

इस साल का नॉबेल पुरस्कार भौतिकी में उन प्रयोगों को सम्मानित करता है जिनमें एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट (चिप) पर क्वांटम भौतिकी को प्रत्यक्ष रूप से दिखाया गया।

सवाल यह है: “किस तक की बड़ी वस्तु में हम क्वांटम विशेषताएँ देख सकते हैं?”
इन वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सर्किट बनाया जिसमें उन्होंने दोनों प्रदर्शित किया — क्वांटम तुन्नेलिंग और ऊर्जा स्तरों की परिमाणिकता — और वो सर्किट इतना बड़ा था कि हाथ में पकड़ा जा सके।

इन उपलब्धियों ने अगली पीढ़ी की क्वांटम तकनीकों — जैसे क्वांटम क्रिप्टोग्राफी, क्वांटम कंप्यूटर, और क्वांटम सेंसर — के विकास के लिए नए अवसर दिए हैं।

विस्तार से समझें:
सामान्यतः, यदि हम बहुत बड़ी चीजों में क्वांटम व्यवहार देखना चाहें, तो “decoherence” या “शोर (noise)” बहुत जल्दी क्वांटम प्रभावों को धूमिल कर देती है। लेकिन यदि हम चिप पर सुपरकंडक्टर्स और जोसेफ्सन जंक्शन का संयोजन अच्छी तरह से बनायें, तो एक समन्वित क्वांटम प्रणाली तैयार हो सकती है।

इस प्रयोग में प्रारंभ में वोल्टेज शून्य अवस्था में था। फिर यह प्रणाली क्वांटम तुन्नेलिंग के कारण बाधा को पार कर गई और वोल्टेज उत्पन्न हुई। साथ ही यह दिखाया गया कि ऊर्जा स्तर केवल विशेष मात्राओं (quanta) में ही बदले।

भविष्य की दिशा:
– चिकित्सीय हिसाब से क्वांटम सेंसर विकसित करना, जो बहुत सूक्ष्म परिवर्तन नाप सकें
– सुरक्षित संचार (quantum cryptography)
– तेज और भरोसेमंद क्वांटम कम्प्यूटर्स

इस खोज ने हमें यह सिखाया कि क्वांटम और क्लासिकल दुनिया के बीच की खाई इतनी भी अचूक नहीं है — यदि हम सही तरीके से डिजाइन करें, तो क्वांटम प्रकृति को बड़ी प्रणालियों में भी देख सकते हैं।

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